अमित श्रीवास्तव की दो कविताएं
नाला झरना एक समान उगना सड़ना एक समान हंसना डरना एक समान गण्डा चिमटा एक समान जीना-मरना एक शब्द है सीधा-उल्टा एक समान लाल लंगोटा
नाला झरना एक समान उगना सड़ना एक समान हंसना डरना एक समान गण्डा चिमटा एक समान जीना-मरना एक शब्द है सीधा-उल्टा एक समान लाल लंगोटा
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पहले हिस्से के लिए इस लिंक पर जाएं अशोक कुमार कम लिखते हैं . छपते लगभग नहीं हैं . तीन दशकों बाद 2014 में उनका
युवा कवि कमल जीत चौधरी से अनुनाद का आग्रह था कि जम्मू-कश्मीर की कविता की पड़ताल करें। उन्होंने एक लम्बा लेख उपलब्ध कराया है, जिसके
935 में जन्मी मेरी ओलिवर अमेरिका की लोकप्रिय कवि हैं – न्यूयॉर्क टाइम्स ने उन्हें अमेरिका की सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली कवि माना है। मुख्य तौर
कई दिन बीते, मैं ढहे हुए नेट की रफ़्तार खोज रहा हूं। कुछ दिन पहले वि.वि. में ईमेल देखे तो पाया कि वहां गीता गैरोला
बहुत समय कवि-कथाकार अनिरुद्ध उमट से सम्पर्क हो पाया है। उमट ख़ामोशी से काम करने वाले लेखक हैं। यहां छप रहे गद्य के लिए अनुनाद
स्वरांगी साने के अनुवाद में मराठी कविताओं की यह दूसरी प्रस्तुति है। कवि और अनुवादक का आभार। *** अपर्णा कडसकर, इस नाम की एक अलग
‘पहली बार’ ब्लाग पर मुसाफ़िर बैठा की कविता से पहला परिचय हुआ। उनकी कविताओं का अपना डिक्शन है, अपनी ही एक आवाज़। उनका कवि धैर्य
भीष्म साहनी के नाटकों में शायद “माधवी” ही है जिसकी चर्चा सबसे कम हुई है बावजूद इसके कि वह पौराणिक कथा पर आधारित होते हुए