हरजीत की ग़ज़लें – अशोक के लिए :2
शोक का एक दिन पूरा हुआ और मैं सिलसिले को वहीँ से उठा रहा हूँ जहाँ से ये टूटा था – यानी अशोक पांडे से
शोक का एक दिन पूरा हुआ और मैं सिलसिले को वहीँ से उठा रहा हूँ जहाँ से ये टूटा था – यानी अशोक पांडे से
पंकज चतुर्वेदी की कविताएं _ इतना ही कहूंगा कि सहजता प्राण है इनका ! इच्छा मैंने तुम्हें देखा और उसी क्षण तुमसे बातें करने की
(हमारे समय में चेतना की धार को कुंद करने वाले शब्दों को उसके सही और वास्तविक मायनों में व्याख्यायित करने वाले प्रख्यात पत्रकार जान पिल्गर
अनुवादक की बातकोरियाई कवि कू-संग की कविताएँ पहली बार मेरे दोस्त अशोक पांडे को इंटरनेट पर उसकी लगातार यात्राओं के दौरान मिलीं। उसे वो पसन्द
युवा कवि गिरिराज किराडू प्रतिलिपि नाम की एक पत्रिका निकलते हैं , जिसके प्रिंटेड रूप से मै परिचित नहीं पर नेट पर हर कोई इस
मेरा सौभाग्य है कि मुझे देवताले जी के एक संकलन पर काम करने का मौका मिल रहा है। यह संकलन स्त्रियों से संबंधित कविताओं का
ये कविता वीरेन जी के नौजवानी के शहर नैनीताल की है और उनके लिए बहुत ख़ास है। अब ये मेरे लिए भी ख़ास होती जा
1950 के बाद से टामस ट्रांसट्रोमर (तोमास त्रांसत्रोमर) लगातार स्वीडिश कविता का सबसे महत्वपूर्ण चेहरा बने हुए हैं। आधुनिक स्वीडिश कविता का कोई भी जिक्र
जैसा अनुनाद के पाठक जानते हैं कि मैं अकसर ही अपने साथ के और बाद के किसी न किसी युवा कवि को अपने ब्लॉग में
इस कविता को प्रगतिशील वसुधा के नए अंक में भी पढ़ा जा सकता है और विलक्षण चित्रकार अमृता शेरगिल की यह विख्यात पेंटिंग यहाँ से