अनुनाद

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मनमोहन की कविताएँ

स्मृति में रहना स्मृति में रहना नींद में रहना हुआ जैसे नदी में पत्थर का रहना हुआ ज़रूर लम्बी धुन की कोई बारिश थी याद

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फ़रोग फरोखज़ाद की कविताएं : अनुवाद एवं प्रस्तुति – यादवेन्द्र

आज से 74 वर्ष पूर्व तेहरान में एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्मी फ़रोग इरानी स्त्रीवादी कविता की अगवा मानी जाती हैं। हालांकि वे महज 32

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तुषार धवल की कविताएँ

(…..अभी मैंने तुषार के कविता संकलन से सम्बंधित पोस्ट लगाई थी। आज मेल में गीत, अनुराग, गिरिराज, व्योमेश आदि दोस्तों को सम्मिलित रूप से भेजी

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हथिया नक्षत्र तथा अन्य कविताएँ – सिद्धेश्वर सिंह

सिद्धेश्वर सिंह कविता के एक खामोश और संकोची किंतु अत्यन्त समर्थ कार्यकर्ता हैं। अपनी कविताओं के जिक्र को वे हमेशा टालते आए हैं इसलिए इस

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ये जो नई फसल है..! – युवा कविता पर अरुण आदित्य की टिप्पणी और तीन कविताएं

अरुण आदित्य 1965 में प्रतापगढ़ में जन्म हुआ़। कविता-संग्रह ‘रोज ही होता था यह सब’ 1995 में प्रकाशित। इसी संग्रह के लिए मध्यप्रदेश साहित्य परिषद

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