अनुनाद

कविता

एकदिन स्त्री चल देती है चुपचाप …दबे पाँव – कमाल सुरेया, अनुवाद एवं प्रस्‍तुति – यादवेन्‍द्र

कमाल सुरेया (1931-1990)   एक दिन स्त्री चल देती है चुपचाप …दबे पाँव  कोई स्त्री रिश्तों को निभाने में सहती है बहुत

Read More...
error: Content is protected !!
Scroll to Top