दुष्यन्त की चार कविताएं
जयपुरवासी दुष्यन्त ऐसे कविसाथी हैं, जिनसे मेरा लम्बा रचनात्मक संवाद रहा है लेकिन अनुनाद अभी तक इस संवाद का हिस्सा नहीं
जयपुरवासी दुष्यन्त ऐसे कविसाथी हैं, जिनसे मेरा लम्बा रचनात्मक संवाद रहा है लेकिन अनुनाद अभी तक इस संवाद का हिस्सा नहीं
वरिष्ठ साहित्यकार दिविक रमेश से हमें अनुनाद के लिए उनकी ये कविताएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें समसामयिकता और उसकी अभिव्यक्ति के
फोन पर हुई बातचीत के बाद सुरेश सेन निशान्त ने स्नेहपूर्वक अपनी कुछ कविताएं भेजी हैं। वे इधर चर्चा में आए
विमलेश त्रिपाठी ने इधर, कहानी और कविता, दोनों में अपनी एक महत्वपूर्ण जगह बनाई है। अनुनाद का उनसे आग्रह था कविता
पिछली पोस्ट की तरह यह पोस्ट भी कविताकोश की सहायता से प्रस्तुत की जा रही है। चन्द्रकांत पाटील मराठी के प्रसिद्ध
हम कवियों के लिए जगदीश स्वामीनाथन चित्रकला की दुनिया में बहुत परिचित और सम्मानित नाम है। साम्यवादी विचार के हामी और
भोपालवासी कवि-कहानीकार और संगीतज्ञ वन्दना शुक्ल की कविताएं समकालीन स्त्री मुहावरे से बाहर निकलने/होने की जिद से भरी नहीं, बल्कि उसके
मनोज कुमार झा से कविताओं के लिए अनुनाद ने अनुरोध किया था और दो महीने का इन्तज़ार भी। अनुनाद पर अप्रकाशित
श्रीकांत दुबे कविता और कहानी के प्रदेश में श्रीकान्त दुबे हमारे ख़ूब जाने-पहचाने प्रतिभावान युवासाथी हैं । मेरी श्रीकांत से एक छोटी-सी
प्रशान्त प्रशान्त मेरे लिए परिचित कवि नहीं रहे हैं अब तक। कुछ कविताएं मैंने ब्लागपत्रिकाओं में पढ़ी हैं। उनकी यह लम्बी