प्रशान्त की लम्बी कविता- आधा रास्ता
प्रशान्त प्रशान्त मेरे लिए परिचित कवि नहीं रहे हैं अब तक। कुछ कविताएं मैंने ब्लागपत्रिकाओं में पढ़ी हैं। उनकी यह लम्बी
प्रशान्त प्रशान्त मेरे लिए परिचित कवि नहीं रहे हैं अब तक। कुछ कविताएं मैंने ब्लागपत्रिकाओं में पढ़ी हैं। उनकी यह लम्बी
हिंदी कविता की परम्परा में बहुत समर्थ और विचार के लिए अत्यन्त स्वप्नशील कवियों ने भी जीवन में कभी न कभी
अपने रचनात्मक सहयोग के साथ यादवेन्द्र अनुनाद के सबसे निकट के साथी हैं। वे हमारी अनुनाद मंडली के सबसे वरिष्ठ साथी
तुषार धवल तुषार हमारे समय का बहुत महत्वपूर्ण युवा कवि है। वो बेहद आत्मीय हमउम्र साथी है इसलिए चाहकर भी मैं
वंदना शुक्ला वंदना शुक्ला की ये कविताएं मुझे उनके मेल द्वारा मिलीं। इन कविताओं की कवि हिंदी के आभासी संसार
मोनिका कुमार: फोटो जानकीपुल से मोनिका कुमार हिंदी के लिए बहुत नई कवि हैं। मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में अभी उनकी कविताएं शायद
मैंने यह पोस्ट बहुत पहले कबाड़खाना पर लगाई थी। इधर ‘कल के लिए’ का अदम विशेषांक पढ़ते हुए मुझे इस कविता
प्रेमचंद गांधी जयपुर में 26 मार्च, 1967 को जन्मे सुपरिचित कवि प्रेमचंद गांधी का एक कविता संग्रह ‘इस सिंफनी में’ और
मैं ब्लागपत्रिकाओं में लगातार रामजी तिवारी की कविताएं पढ़ता रहा हूं। उनकी कविताओं में बोली-बानी अलग है…ठेठ देशज संस्कार वाली। उनमें
नरेश चन्द्रकर मेरे प्रिय अग्रज कवि हैं। उनकी आवाज़ इतनी शान्त, गहरी और मद्धम है कि कम ही सुनाई देती है।