नरेश चन्द्रकर की कविताएं
नरेश चन्द्रकर मेरे प्रिय अग्रज कवि हैं। उनकी आवाज़ इतनी शान्त, गहरी और मद्धम है कि कम ही सुनाई देती है।
नरेश चन्द्रकर मेरे प्रिय अग्रज कवि हैं। उनकी आवाज़ इतनी शान्त, गहरी और मद्धम है कि कम ही सुनाई देती है।
अनुनाद पर पिछली दो पोस्ट से प्रेम का एक गुनगुना अहसास-सा बना हुआ है, जो मुझे सुखद लग रहा है…तरह-तरह की
अग्रज और वरिष्ठ कवि विनोद कुमार शुक्ल के प्यारे-से नए कविता संग्रह ‘कभी के बाद अभी’ का शीर्षक बहुत आभार और
विचित्र लेकिन बहुत सुन्दर है आज की, अभी की हिंदी कविता का युवा संसार….कितनी तरह की आवाज़ें हैं इसमें….कितने रंग-रूप…कितने चेहरे…अपार
मेरी इस पोस्ट का मक़सद बस इतना है कि इधर लिखी हुई कविताएं सब एक जगह हो जाएं और कभी वक़्ते-ज़रूरत
ये हमारे समय के दो महत्वपूर्ण युवा कवि और उनकी कविताएं हैं। कवियों ने इन्हें अलग-अलग समयों, स्थानों और तनाव में
मैं ब्लागिंग की अपनी शुरूआत में काफी सक्रिय रहा…फिर ग़ायब-सा हो गया या कहिए कि होना पड़ा। इस बीच कुछ बहुत सुन्दर
अशोक कुमार पांडेय हिंदी की युवा कविता के कुछ सबसे सधे हुए कवियों में है, जिसके सधे हुए होने में भी
बिक्रम के ये पद मृत्युंजय के मुख से प्रकट हुए हैं। मृत्युंजय वामदिशा वाले सक्रिय साहित्यकर्मी हैं। कविताएं लिखते हैं, आलोचक
आमतौर पर रोजमर्रा के व्यवहार में तितलियों को आसानी से पहुँच बना सकने वाली मनमौजी स्त्रियों के तौर पर लिया जाता है