संजय व्यास की कविता
एक करवट और उसकी बेचैनी औंधे गिरे भृंग की तरह थी जो सिर्फ एक जीवनदायी करवट चाहता था.एक अर्ध-घूर्णन. फिर सब
एक करवट और उसकी बेचैनी औंधे गिरे भृंग की तरह थी जो सिर्फ एक जीवनदायी करवट चाहता था.एक अर्ध-घूर्णन. फिर सब
गुप्त वस्तुओं की सूचना ज़बान के तरीक़े तमामइतने भी नहीं किशरबत के किस्से अधूरे पड़ जाएँ सुनोगी और हंसते—हंसतेनिकलोगी दरवाजे से
शिलोंग में रहने वाले तरुण भारतीय मैथिल फिल्मकार और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उनकी कविताएँ पहल, हंस, समकालीन भारतीय साहित्य, अक्षर पर्व,
काले द्वीप दारियो के लिए इएला नेग्रा* मेंनेरुदा की कब्र और बगीचे में पड़े लंगर के बीचउस आदमी ने, जिसके हाथ
(दुनिया में अनाचार और अनाचारियों की उपस्थिति कभी कभी किसी कवि को कितना क्रोधित, हताश और क्षुब्ध करती है, इसका एक
कविता इसलिए कि मेरे तलवे मेरी माँ जैसे हैंजन्नत है माँ के क़दमों तले -मुहम्मद साहब और ताज्जुब कर रही हूँ
हिन्दी कविता में इलाहाबाद सबसे ज़्यादा है तो वीरेन डंगवाल की कविता में। उनके हर संग्रह में यह शहर पूरी विकलता
पारुल एक समर्थ और लोकप्रिय ब्लोगर हैं। वे झारखंड में रहती हैं…… …पारूल…चाँद पुखराज का…… किसी परिचय का मुहताज नहीं। मैंने
वे रहे, हू ब हू वैसे ही, जैसे वे थे उन्होंने चांद को पूजा – लेकिन थोड़ा कम उन्होंने टोकरियां बनाईं
आज दोपहरमेरे जीवन के भीतर एक औरत चली जा रही थीगुस्से मेंअपने चार साल के बच्चे के साथ बच्चे के कंधे