
कहानी


ईजा / गिरीश अधिकारी
अरे ईजा! तू तो बहुत दुबली पतली हो गई , क्या हुआ तुझे?” पूरे दो साल बाद दिल्ली से गांव आया


मैं नहीं जा रही स्कूल /ओरहान पामुक/ अनुवाद सिद्धेश्वर सिंह
मैं स्कूल नहीं जा रही हूँ। मुझे ठंड लग रही है। स्कूल में मुझे कोई भी पसंद नहीं करता। मैं स्कूल

एक अख़बार की कहानी/लेखक-ओ.हेनरी अनुवाद -योगेश ध्यानी
सुबह 8 बजे ताजा अखबार ग्यूसेप्पी के समाचार-स्टैंड पर पड़ा था, उस पर अभी भी छपाई का गीलापन था। ग्यूसेपी अपनी

आशियाना/ पूजा गुप्ता
आनन-फानन में रामेश्वरी ने अपना सामान बांध लिया और चलने को तैयार भी हो गई। गुस्से की इन्तहा इतनी थी कि

रधुली/अंजलि नैलवाल
बाईं तरफ करवट ली हुई, बायां हाथ सिरहाने-सा रखा हुआ, और घुटने पेट तक मुड़े हुए। शरीर अकड़ चुका था।

पॉंच लघुकथाएं/ सुनील गज्जाणी
पानी “यूँ एक टक क्या आकाश को ताक रहे हो?” “नहीं, बादलों को!” “मगर आकाश तो एक दम

मकान मालकिन (रोऑल्ड ढल)/हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह
बिली वीवर लंदन से अपराह्न वाली धीमी गति की रेलगाड़ी से, रास्ते में स्विंडन में गाड़ी बदलता हुआ, यात्रा करके आया

आसमानी शर्ट – कहानी : प्रतिभा गोटीवाले
प्रतिभा गोटीवाले हिन्दी की सुपरिचित कवि- कहानीकार हैं। स्मृतियों के रंग की शिनाख़्त और विस्मृतियों के रंग की तलाश करती उनकी