अनुनाद

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जब भी कोई स्थायी पता पूछता है, मैं मुस्कुरा देता हूं- ललन चतुर्वेदी की कविताएँ

        कविता लेखन पर निजी जीवन और अनुभवों का विशेष प्रभाव होता है, जब यही अनुभव लोक मानस से जुड़ जाते हैं, तब

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होने और न होने की बहसों के बीच मैं ईश्वर की तलाश में हूँ- अशोक कुमार की कविताएं

   अशोक कुमार की कविताओं में लोक का  ठेठपन, उसकी पीड़ा, उसकी चुनौतियाँ, उसके  निश्चल स्वप्न , समाज का  खोखलापन और जन्मभूमि से प्रवासित होने

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टर्रापन लिए मीठे फल – भूपेन्‍द्र बिष्‍ट की कविताऍं

भूपेन्‍द्र बिष्‍ट लम्‍बे समय से कविता लिख रहे हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति समकालीन दृश्‍य में एक ख़ामोश और संकोची उपस्थिति रही है। दैनिक जीवन की

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कैरेबियाई कवि डेरेक वालकाट की 10 कविताऍं – चयन एवं अनुवाद : श्रीविलास सिंह

श्रीविलास सिंह ने विश्‍वकविता से बहुत महत्‍वपूर्ण अनुवाद हिन्‍दी में सम्‍भव किए हैं। हमेें कैरिबियाई कवि डेरेक वॉलकाट की दस कविताऍं मिली हैं। संसार में

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दुबई एक रंगीन सिगरेट की डिब्बी की शक्ल में – गौरव सिंह की दो कविताऍं

गौरव सिंह की कविताऍं महानगरों, अजनबीपन, व्‍यर्थताओं और ऐसे ही कई-कई बार कहे-लिखे गए प्रसंगों को अपने भावबोध के सहारे अलग और नए तरीक़े से

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एक उड़ती हुई चिड़िया की ओर – नेहल शाह की कविताएं

हिन्दी कविताओं में इधर बीच सामने आई संभावनाओं में नेहल साह की कविताओं में अस्मिता से जुड़े प्रश्नों के स्पष्ट स्वर दिखाई  देते हैं। अनुनाद पर

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बारहों ऋतुओं में ठहरा तुम्‍हारा स्‍पर्श – गीता गैरोला की कविताऍं

  गीता गैरोला प्रख्‍यात सामाजिक कार्यकर्ता हैं। महिला समाख्‍या में कार्य करते हुए उन्‍होंने साधारण भारतीय स्त्रियों की सामाजिक स्थिति का बहुत निकटता से अनुसंधान

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पेड़ और पत्तों की रज़ामन्दी से आता है पतझड़ – राही डूमरचीर की कविताऍं

हिन्‍दी कविता में इधर सामने आयी संभावनाओं में राही डूमरचीर ने तेज़ी से अपनी पहचान बनाई है। देश के उपेक्षित इलाक़ों, नागरिकता और अस्मिताओं की

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