अनुनाद

All Blogs

कहानी

परिणाम – कौशलेन्‍द्र

छत की मुंडेर से सटकर खड़े पुराने नीम के पेड़ की डाल से पत्तियां तोड़ते हुए, वो ढलती सांझ के सूरज को देख रहा था।

Read More »
आलोचना / समीक्षा

कोणार्क : कला का औदात्य और शिल्पी का समर्पण – अंबुज कुमार पाण्डेय

कुबेरनाथ राय और धर्मवीर भारती ने समर्पित कलासाधक को ‘संपाती’ के तुल्य बताया है। सौंदर्य का ऐसा उपासक जो सच्ची कला को निरावरण देखने की

Read More »
कविता

असल के पीछे का असल अकसर ख़ामोश खड़ा रह जाता है – अर्चना गौतम ‘मीरा’ की कविताऍं

प्रेम – 1 अत्यंत बलवती थी उसकी इच्छा जीवन वरण की डस गया तभी  प्रेम पिघला वाहिनियों में पीड़ा का स्वेद ज्वर मियादी का मार

Read More »
कविता

मैने मुट्ठी में भींच कर रखा एक ख़्वाब था – प्रीति आर्या की कविताऍं

  अपना एक कोना  एक स्त्री! अपने आस पास,  सब कुछ रचती है बड़े इत्मीनान से ख़ाली मकान को  बंजर ज़मीन को खंडहर को ख़ुद

Read More »
कविता

एक को तोड़े बिना दूसरे से जुड़ जाना बहुत मुश्किल होता है – शंकरानंद की कविताऍं

सँभालने की कला चीजें जब एक के बाद एक आती हैं तोअपनी जगह बनाती जाती हैंराख हो फूल हो कागज़ हो याकोई लकड़ी का टुकड़ाउनके

Read More »
error: Content is protected !!
Scroll to Top