अनुनाद

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कविता

वह धुंआ, तपती जमीन, खांसी और मौत को एक ख़तरनाक कविता की तरह जी जाएगा – अनामिका अनु की कविताएँ

अनामिका अनु की कविताओं का स्‍वर अलहदा है। उनकी एकान्तिक अनुभूतियों में भी एक अलग तरह की सामूहिकता है, जो पाठक को इन कविताओं से

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कविता

तुम्हें ख़ून चूसने वालों के दांतों से अधिक चुभना चाहिए उनका भिंचा हुआ जबड़ा / पल्‍लवी की कविताऍं

पल्‍लवी की कविताएं समाज में व्‍याप्‍त विसंगतियों,पाखंड से संवेदना भरे मन में होने वाली उथल-पुथल को सामने लाती हैं। इन विसंगतियों से पार पाने के

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कहानी

महाकवि पिण्टा सुबोधिनी – प्रचण्‍ड प्रवीर

दोनोँ रचनाओँ की अन्‍यत्र अस्वीकृति के कारण निम्न हैँ: –   महाकवि पिण्टा की अस्वीकृति के कारण इस तरह बताए गए थे –१. विद्वेषपूर्ण रचना –

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समाज और संस्कृति

बैैजनाथ मंदिर (फोटो फीचर) – विनीता यशस्‍वी

बैजनाथ मंदिर उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गोमती नदी के किनारे बसा है, जो अल्मोड़ा से लगभग 70 किमी उत्तर-पश्चिम में है। ये कुमाऊँ हिमालय

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कहानी

परिणाम – कौशलेन्‍द्र

छत की मुंडेर से सटकर खड़े पुराने नीम के पेड़ की डाल से पत्तियां तोड़ते हुए, वो ढलती सांझ के सूरज को देख रहा था।

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आलोचना / समीक्षा

कोणार्क : कला का औदात्य और शिल्पी का समर्पण – अंबुज कुमार पाण्डेय

कुबेरनाथ राय और धर्मवीर भारती ने समर्पित कलासाधक को ‘संपाती’ के तुल्य बताया है। सौंदर्य का ऐसा उपासक जो सच्ची कला को निरावरण देखने की

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