अनुनाद

आलोचना / समीक्षा

अवरोह / विजेताओं से भरे इस विश्व में, प्रेम एक पराजय का नाम है – सुबोध शुक्ल : प्रस्तुति – आशीष मिश्र

आशीष मिश्र की ओर से मुझे यह सुखद संचयन प्राप्त हुआ। इसे भेजते हुए आशीष ने लिखा है –”मैंने सुबोध जी

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एक पागल आदमी की चिट्ठी-सी विकल कविता – विमलेश त्रिपाठी की दो लम्बी कविताओं पर रसाल सिंह का लेख

विमलेश त्रिपाठी समकालीन समय के सर्वाधिक संभावनाशील और विश्वसनीय युवा साहित्यकार हैं। उन्होंने हम बचे रहेंगे, एक देश और मरे हुए

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हल और हलंत के कवि: अष्टभुजा शुक्ल के कविता संग्रह पर आशीष मिश्र

इस समीक्षा का मूल रूप ‘पक्षधर’ में छपा है। यहां इसे संशोधन (समीक्षक के शब्दों में काफ़ी जोड़-घटाव)  के उपरान्त पुन:प्रकाशित

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अँधेरे से बाहर उम्मीद और रौशनी की कविताएं : राहुल देव के कविता संग्रह पर विनोद कुमार

‘उधेड़बुन’ हर सजीव प्राणी के अन्दर कभी न कभी अवश्य होती है | छोटे लोगों के पास अपनी छोटी उधेड़बुनें हैं

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