एक स्यापा करती हुई जगह – जॉन बर्जर
आज महमूद दरवेश की पहली बरसी पर उन्हें याद करते हुए प्रस्तुत है प्रसिद्ध ब्रिटिश कला समीक्षक-लेखक जॉन बर्जर का यह आलेख. मूल अंग्रेज़ी आलेख
आज महमूद दरवेश की पहली बरसी पर उन्हें याद करते हुए प्रस्तुत है प्रसिद्ध ब्रिटिश कला समीक्षक-लेखक जॉन बर्जर का यह आलेख. मूल अंग्रेज़ी आलेख
तस्वीर यहाँ से साभार ‘कवि’क़लम अपनी साध ,और मन की बात बिलकुल ठीक कह एकाध . यह कि तेरी-भर न हो तो कह ,और बहते
इस पोस्ट पर आ रही टिप्पणियों को देखते हुए इसकी तारीख आगे बढ़ा दी गई है। सबसे यही प्रार्थना है कि तनिक संयमित रहते हुए
चयन एवं प्रस्तुति : पंकज चतुर्वेदी कविता , युग की नब्ज़ धरो कविता , युग की नब्ज़ धरो अफ़रीका , लातिन अमेरिकाउत्पीड़ित हर अंग एशियाआदमखोरों
वैसे तो ये दोनों कविताएँ अच्छी हैं लेकिन परंपरा के हाथ भी पीठ पर हों और कवि का अंदाज़ नव्यतम हो, इसका एक दुर्लभ उदाहरण
तुम्हारे पंजे देखकरडरते हैं बुरे आदमी तुम्हारा सौष्ठव देखकरखुश होते हैं अच्छे आदमी यही मैं चाहूँगा सुननाअपनी कविता के बारे में .( 1941-47 )( अनुवाद
एक गाँधी अध्ययन केन्द्र के सेमिनार का निमंत्रण मिलने पर अचानक निराला की यह कविता याद आने लगी है ………..इसके लगाने के लिए फोटो की
सोकार्दा इस्त्री सावित्री, जिन्हें आमतौर पर सोक सावित्री के नाम से जाना जाता है, 1968 में मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया के हिन्दू बहुल बाली प्रांत में
हमारे सहलेखक पंकज चतुर्वेदी अनुनाद पर एक स्तम्भ शुरू कर रहे हैं। यह विशेष रूप से नए लेखकों के लिए है। इसके लिए रचनाओं के
अनुनाद पर मेरी पहली पोस्ट के रूप में प्रस्तुत है जर्मन अभिव्यंजनावादी कवि जार्ज हेइम (३० अक्तूबर १८८७ – १६ जनवरी १९१२) की एक कविता……..अनुवाद