अनुनाद

कविता

बारहों ऋतुओं में ठहरा तुम्‍हारा स्‍पर्श – गीता गैरोला की कविताऍं

  गीता गैरोला प्रख्‍यात सामाजिक कार्यकर्ता हैं। महिला समाख्‍या में कार्य करते हुए उन्‍होंने साधारण भारतीय स्त्रियों की सामाजिक स्थिति का

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पेड़ और पत्तों की रज़ामन्दी से आता है पतझड़ – राही डूमरचीर की कविताऍं

हिन्‍दी कविता में इधर सामने आयी संभावनाओं में राही डूमरचीर ने तेज़ी से अपनी पहचान बनाई है। देश के उपेक्षित इलाक़ों,

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ईश्वर को प्राप्त है हर चीज़ की आड़ – योगेश ध्‍यानी की कविताऍं

योगेश ध्‍यानी की कविताऍं समकालीन हिन्‍दी कविता में बिलकुल नया एक बयान हैं। नया होने के बावजूद वे किसी असाधारण शिल्‍प

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बेटियों के गुमसुम रहने से पिताओं की उम्र कम होती है – सपना भट्ट की कविताएं

  प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता चन्‍द्रकान्‍त देवताले की प्रसिद्ध कविता है। इस नाम से एक शानदार संग्रह का चयन एवं

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दिव्‍या श्री की कविताएं

दिव्‍या श्री हिन्‍दी की युवतर कवि हैं। उनकी कविताएं अपने क्रिया-व्‍यवहार और अनुभव में आंचलिक के तद्भव से लेकर शास्‍त्रीयता के

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पारस्परिक समझ का वृक्ष दमकता हुआ सीधा और सरल – विस्वावा शिम्बोर्स्का की कुछ कविताएँ : अनुवाद – श्रीविलास सिंह

एक वाक्य में कविता की परिभाषा ! अच्छा, ठीक है. हम कम से कम पांच सौ परिभाषाएं जानते हैं लेकिन उनमें

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तुम जा रहे हो और आंखें मिला नहीं पा रहे – राजीव कुमार की कविताऍं

अनुनाद पर पहली बार प्रकाशित हो रहे कवि राजीव कुमार इतिहास और हिंदी साहित्य के छात्र रहे। “इंडियाज़ इस्लामिक कंसर्न” पर

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सहूलियात के विरुद्ध अदावतों के इलाक़ों में – विष्‍णु खरे (दूसरे स्‍मृति-दिवस पर विशेष) – सौजन्‍य : कुमार अम्‍बुज

विष्‍णु खरे की दूसरी पुण्‍यतिथि है। किसी भी दौर में भाषा और समाज की कविता समग्रता में केवल एक कवि की

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तब केवल उम्मीदों में होते हैं बीज और बारिश – राकेश मिश्र की कविताऍं

राकेश मिश्र जी की कविताओं में गाँव है, वहां की पगडंडी है, प्रकृति है, प्रेम है, आम आदमी और मेहनतकशों के प्रति गहरी संवेदना

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