
ऋतुराज : कविता, विचार और आत्मीयता के बीच/शैलेन्द्र चौहान
कुछ कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं और धीरे-धीरे उनकी कविताओं के साथ उनका व्यक्तित्व भी हमारी चेतना का

कुछ कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं और धीरे-धीरे उनकी कविताओं के साथ उनका व्यक्तित्व भी हमारी चेतना का

वीरेन डंगवाल को याद करना एक शीतोष्ण ऋतु को याद करना है। न बहुत गर्म, न बहुत ठंडी—एक ऐसी ऋतु जिसमें धूप में

बीहड़, अघोर और प्यारे कवि स्वामी अंतर नीरव की नेटिविटी तो क्राॅस फायरिंग के लिए बदनाम इलाक़े पुंछ सेक्टर की है, पर अब

नेत्रसिंह रावत की इस पुस्तक से पहला परिचय 1992 में हुआ, यानी इसके प्रकाशन के लगभग दस वर्ष बाद और मेरी ख़ुद की उम्र तब

सारांश : कमल जीत चौधरी की कविताओं में जल, जंगल और ज़मीन के स्वर प्रमुख रूप से उभरते हैं, जो हमारे समय के

“तेरी शरण मेरे सतगुरु मेरे पूरे, मन निर्मल होये संता दूरे कर कृपा ” सुबह सवेरे ही घर के बाहर की तरफ़ बैठक के

चन्दन कुमार की कविताएं अटपटे सामाजिक बंधनों, दुर्व्यवस्थाओं और खोखलेपन से लिथड़े समाज के प्रति अन्तर्मन की छटपटाहट को व्यक्त करती हैं। उत्तरआधुनिक हो चले

बकरी चराती लड़की धूप उतर जाती है उसके कपड़ो पर ओढ़नी बनाकर ढ़क लेती है धूप से अपनी देह को वह ताकि पहाड़ों का

हिमांशु की कविताएं अपने आस-पास बिखरे लोक की भावनाओं को उसी के डिक्शन में अभिव्यक्त करती हैं, जहां कहीं ये कविताएं उस

दीप्ति कुशवाह की ये कविताएं, शोर से बहुत दूर पाठक को अपने भीतर के एकांत में ले जाती हैं। निरन्तर बाहर की उलझनों से क्लांत


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