
हम कभी इतने रिक्त नहीं होते कि उनकी आवाज़ सुन सकें/ दीप्ति कुशवाह की कविताएं
दीप्ति कुशवाह की ये कविताएं, शोर से बहुत दूर पाठक को अपने भीतर के एकांत में ले जाती हैं। निरन्तर बाहर की उलझनों से क्लांत

दीप्ति कुशवाह की ये कविताएं, शोर से बहुत दूर पाठक को अपने भीतर के एकांत में ले जाती हैं। निरन्तर बाहर की उलझनों से क्लांत

कल्पना जसरोटिया की कहानी ‘देहरी’ आज के समय में भी गॉंवों में खेती-मज़दूरी से बसर करने वालों की ख़स्ता-हालत, शोषण और अंधविश्वासों की

धर्मपाल महेंद्र जैन एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जो वतन से दूर रहकर कभी अपनी मिट्टी से दूर न हो सका, और वहाँ रहकर भी सतत

स्मृति की रेखाएँ जीवन में जितना पीछे जाती हैं एक धुंधली सी तस्वीर उभरती है, जहाँ किसी यात्रा में मैं वाहन में कोई संगीत सुन

मुझे यात्रा संस्मरण बहुत लुभाते हैं। यह, अपने भीतर के उन खाली कोनों को भरने का इलहाम देते हैं, जो भरे नहीं जा सके या

योगेन्द्र पांडेय की कविताएं प्रकृति, प्रेम, सौन्दर्य, आशा-निराशा, जीवन दर्शन के बीच विचरती रहती हैं। समकालीन कविता संसार में ये कविताएं कहीं-कहीं छायावाद और

शैलेन्द्र चौहान की कविताएं वैश्विक स्तर पर व्याप्त विषमताओं से व्याकुल कवि मन को दर्शाती हैं। चारों ओर फैले कुहासे में सूरज की किरण

कुँवर रवीन्द्र सिंह की कविताएं पहाड़ की सड़कों की तरह मोड़दार हैं। वैश्विक दृश्यों में चलती हुई, अचानक से संवेदनाओं में लौटती इन कविताओं का

ज्योतिकृष्ण वर्मा की ये कविताएं आकार में छोटी और कहन में बड़ी हैं। हमारे आस-पास के रूपकों को बरतते हुए वे आख्यान के रूप में

अनामिका अनु की कविताओं का स्वर अलहदा है। उनकी एकान्तिक अनुभूतियों में भी एक अलग तरह की सामूहिकता है, जो पाठक को इन कविताओं से

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