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कविता

भटकने से एक दिन मिल ही जाता है इस जनम के गूढ़ सवालों का जवाब/ योगेन्‍द्र पांडेय की कविताएं

  योगेन्‍द्र पांडेय की कविताएं प्रकृति, प्रेम, सौन्‍दर्य, आशा-निराशा, जीवन दर्शन के बीच विचरती रहती हैं। समकालीन कविता संसार में ये कविताएं कहीं-कहीं छायावाद और

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कविता

और इसी भीड़ में सबसे बड़ा अकाल मनुष्य का है/ शैलेन्‍द्र चौहान की कविताएं

  शैलेन्‍द्र चौहान की कविताएं वैश्विक स्‍तर पर व्‍याप्‍त विषमताओं से व्‍याकुल कवि मन को दर्शाती हैं। चारों ओर फैले कुहासे में सूरज की किरण

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कविता

अपने बच्चों में ख़ुदा की सूरत देखती माँओं को क्या ज़वाब दोगे तुम/कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं

कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं पहाड़ की सड़कों की तरह मोड़दार हैं। वैश्विक दृश्‍यों में चलती हुई, अचानक से संवेदनाओं में लौटती  इन कविताओं का

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कविता

जिन नदियों को पृथ्वी पर जगह न मिली उन्होंने चुन लिया मनुष्य की आँखों में रहना!/ज्योतिकृष्ण वर्मा की कविताएं

ज्‍योतिकृष्‍ण वर्मा की ये कविताएं आकार में छोटी और कहन में बड़ी हैं। हमारे आस-पास के रूपकों को बरतते हुए वे आख्‍यान के रूप में

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कविता

वह धुंआ, तपती जमीन, खांसी और मौत को एक ख़तरनाक कविता की तरह जी जाएगा – अनामिका अनु की कविताएँ

अनामिका अनु की कविताओं का स्‍वर अलहदा है। उनकी एकान्तिक अनुभूतियों में भी एक अलग तरह की सामूहिकता है, जो पाठक को इन कविताओं से

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कविता

तुम्हें ख़ून चूसने वालों के दांतों से अधिक चुभना चाहिए उनका भिंचा हुआ जबड़ा / पल्‍लवी की कविताऍं

पल्‍लवी की कविताएं समाज में व्‍याप्‍त विसंगतियों,पाखंड से संवेदना भरे मन में होने वाली उथल-पुथल को सामने लाती हैं। इन विसंगतियों से पार पाने के

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कहानी

महाकवि पिण्टा सुबोधिनी – प्रचण्‍ड प्रवीर

दोनोँ रचनाओँ की अन्‍यत्र अस्वीकृति के कारण निम्न हैँ: –   महाकवि पिण्टा की अस्वीकृति के कारण इस तरह बताए गए थे –१. विद्वेषपूर्ण रचना –

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समाज और संस्कृति

बैैजनाथ मंदिर (फोटो फीचर) – विनीता यशस्‍वी

बैजनाथ मंदिर उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गोमती नदी के किनारे बसा है, जो अल्मोड़ा से लगभग 70 किमी उत्तर-पश्चिम में है। ये कुमाऊँ हिमालय

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